हंस फ़ाउंडेशन हॉस्पिटल्स

उत्तर भारत में स्थित उत्तराखंड राज्य में एक करोड़ से ज़्यादा लोग रहते हैं और 70% से ज़्यादा आबादी दूर-दराज के छोटे गांवों में रहती है। क्योंकि ज़्यादा डॉक्टर गावों में काम नहीं करते, अधिकांश लोगों को सामान्य चिकित्सा सुविधाएं भी मुहैया नहीं होती। इस समस्या के समाधान के लिए हंस फ़ाउंडेशन ने हंस हंस फ़ाउंडेशन हॉस्पिटल्स की स्थापना की जिसका उद्देश्य उत्तराखंड और आस पास के इलाकों में सस्ती और अच्छी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

हंस फ़ाउंडेशन जेनरल हॉस्पिटल, सतपुली

thf-satpuli-hospital-001-600x400हिमालय के पौड़ी जिले में सतपुली शहर के पास 10 एकड़ के क्षेत्र में बन रहा हंस फ़ाउंडेशन हॉस्पिटल 150 बेड का मल्टिस्पेशियालिटी आधुनिक हॉस्पिटल है जो कि इस क्षेत्र के लोगों की चिकित्सा-संबंधी ज़रूरतों को पूरा करेगा। हॉस्पिटल की एक ओपीडी विंग खुल चुकी है और 66000 से ज़्यादा मरीज़ों का यहां मुफ़्त में इलाज हो चुका है। बाकी का हॉस्पिटल 2017 के अंत तक खुलेगा। इसमें डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ के रहने की भी सुविधा होगी। पौड़ी क्षेत्र के बीच में बसा सतपुली शहर गावों के लोगों के लिए चिकित्सा सेवाओं का एक अनमोल केंद्र बन जायेगा।

हंस फ़ाउंडेशन आई केयर

thf-eyecare008-600x400भारत में 6.3 करोड़ लोगों को ठीक दिखाई नहीं देता है। उनमें से 80% लोगों की समस्या आंखों के डॉक्टर या हॉस्पिटल आसानी से दूर कर सकते हैं। उत्तराखंड में आंखों की समस्याओं से जूझ रहे लोगों की सहायता करने के लिए हंस फ़ाउंडेशन हॉस्पिटल्स हरिद्वार में 4 एकड़ क्षेत्र में हंस फ़ाउंडेशन आई केयर स्थापित कर रहा है। अभी आंखों के कई ट्रीटमेंट, जैसे कि मोतियाबिंद और अन्य ऑपरेशन इस हस्पताल के एक छोटे से विंग में किये जा रहै हैं। इसके अलावा दूर के गावों और स्कूलों में कैंप लगाए जा रहे हैं। कैंप मे आए जिन लोगों को सर्जरी की ज़रूरत होती है उन्हें हरिद्वार लाया जाता है और ऑपरेशन के लिए उनके ठहरने का इंतजाम भी किया जाता है। हॉस्पिटल को और बड़ा करने के लिए बिल्डिंग पर काम चलता रहेगा। इस बीच में गांव के लोगों को घर के पास सुविधाएं मुहैया कराने के लिए विजन सेंटर्स पर भी खोले गए हैं। हंस फ़ाउंडेशन आई केयर 30 जून, 2014 खुला था। तब से 70,000 से ज़्यादा लोगों की आंखों का इलाज मुफ्त में या सब्सिडाइज्ड दरों पर हो चुका है। हर साल हम और भी ज़्यादा लोगों की सेवा कर रहे हैं।

हंस फ़ाउंडेशन मोबाइल हेल्थ क्लिनिक

भारत के गावों में कभी भी स्वास्थ्य सेवाएं ढंग से नहीं रही हैं। हंस फ़ाउंडेशन हॉस्पिटल्स ने कई मोबाइल हेल्थ क्लिनिक बनाए हैं जो कि ज़रूरी मेडिकल उरकरणों से फिट की हुई गाड़ियां हैं। ये गाड़ियां दूर-दराज के गावों में घूम-घूमकर ज़रूरी चिकित्सा-सेवाएं प्रदान करती हैं। इस सिस्टम के जरिए ऐसे दसियों हज़ार लोगों तक आधुनिक चिकित्सा सेवाएं पहुंच रही हैं, जिन्हें कहीं और से ये सुविधा नहीं मिलती। ये सिस्टम भारत की कई और संस्थाओं ने भी अपना लिया है।

Patient Stories

singhजय सिंह
मार्च, 2015. 65-साल के जय सिंह का कोई ठिकाना नहीं है। पेट भरने के लिए वह भीख मांगते हैं। फेसियल पाल्सी की वजह से उनकी बाईंं आंख की हालत खराब है। हंस फ़ाउंडेशन आई केयर में प्लास्टिक सर्जरी…और

वीणा देवी
वीणा देवी, अक्सर सतपुली हॉस्पिटल में इलाज के लिए आती हैं। हॉस्पिटल में वह एक जाना पहचाना चेहरा हैं और वह यहां ऐसे रहती हैं जैसे कि उनका घर हो। वह बहुत खुश हैं कि…more