पार्वती

पार्वती की शादी चार साल की उम्र में ही तय हो गई थी। चौदह साल की उम्र में वह गौना करा के ससुराल आई। यह चालीस साल पहले की बात है। अब उनके सात बच्चे हैं – पांच बेटियां और दो बेटे। उनकी सबसे छोटी बेटी दसवीं कक्षा में है, और उससे बड़ी बी. ए. की पढ़ाई पूरा करने वाली है। पार्वती खुद पढ़ी-लिखी नहीं है और अपनी नाम लिख पाने पर उन्हें बड़ा फ़क्र है।

पार्वती का मायका और ससुराल दोनों ही गरीब थे। लेकिन समय के साथ उनके हालात बेहतर हुए। पार्वती अपने खेतों में काम करती हैं और उनके पास कुछ पशु भी हैं। उनके पति ईंट की भट्टी में काम करते  हैं। वे अपने छोटे बच्चों के साथ उत्तर प्रदेश के तोमार पुरवा गांव में दो कमरों के मकान में रहते हैं। एक कमरे की छत पक्की है, लेकिन दूसरे कमरे और रसोई की कच्ची। पार्वती की छोटी बेटी को शिकायत है कि बरसात में कच्ची छत से बहुत दिक्कत होती है।

पार्वती के घर में बिजली का कनेक्शन नहीं था। उन्हें हंस फ्री इलेक्ट्रिक™ बाइक से बहुत सुविधा हुई। बाइक को रोज़ सुबह पैडल करना उनकी छोटी बेटी का काम है। वह लगभग दो घंटे पैडल करती है। बाइक की लाइट बच्चों की शाम की पढ़ाई में काम आती है। पार्वती उसे अपने खेतों के काम के लिए भी इस्तेमाल करती हैं। जिस दिन हमने उनसे बात की, उस दिन वह एक बल्ब खेतों में ले जाने वाली थीं शाम में आलू रोपने के लिए। उनके पास एक “इमरजेंसी लाइट” भी है, जिसे वे बाइक से चार्ज करते हैं।

पार्वती की पोर्टेबल लाइट की ज़रूरत देख कर हमने हंस™ पावरपैक बनाया।